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स्वपरिचयः (Self Introduction)

स्वपरिचयः (Self Introduction) 1)  स्वपरिचयः (Self Introduction) 1) मम नाम .....विपिनः..... । (My name is Vipin ) 2) अहम् ............ कक्षायां पठामि।            (I am Studying in class ……..) 3) मम विद्यालयस्य नाम केन्द्रीय विद्यालाय .............. अस्ति। (I Study in Kendriya Vidyalaya ……………….) 4) अहं मूलतः .....हिमाचलतः..... अस्मि।      (I am basically from Himachal) 5) वर्तमाने अहम् …………. इति स्थाने निवसामि ।    (I live in ………………) 6) मम पितुः नाम............अस्ति,  सः ....अध्यापकः.... अस्ति।* (My Father’s name is .………. he is a Teacher) 7) मम मातुः नाम .............. अस्ति, .सा ...गृहिणी... अस्ति। * (My Mother’s name is ………… she is a HouseWife) 8) मम रुचिः .....अध्ययने, पाठने..... च अस्ति/सन्ति।#  (My hobbies are Studying & Teaching) 9) अहम् .....प्राध्यापकः..... भवितुम् इच्छामि ।* (I want to be a Professor)         --------------------------...

छात्र-प्रतिज्ञा (संस्कृत) Student's Pledge (Sanskrit)

छात्र-प्रतिज्ञा (संस्कृत) Student's Pledge (Sanskrit) भारतं अस्माकं मातृभूमि:। वयं सर्वे भारतीया: भ्रातरः भगिन्यः च। अस्माकं मातृभूमि: प्राणेभ्योsपि प्रियतरा अस्ति। अस्या: समृद्धौ विविध-संस्कृतौ च अस्माकं गर्वः अस्ति। वयं अस्या: सुयोग्याः अधिकारिणः भवितुं सदा प्रयत्नं करिष्याम:। वयं स्वमातापित्रो: शिक्षकाणां गुरुजनानां च आदरं करिष्याम:  सर्वैः च सह शिष्टतया व्यवहारं करिष्याम:।  वयं स्वदेशं देशवासिनं च प्रति कृतज्ञतया वर्तितुं प्रतिज्ञां कुर्म:।  ‎तेषां कल्याणे समृद्धौ च न: सुखं निहितम् अस्ति। जयतु संस्कृतम्। जयतु भारतम्।

संस्कृत-जन्मदिन-गीतम् (Birthday Song)- जन्मदिनम् इदं, अयि प्रिय सखे...

संस्कृत-जन्मदिन-गीतम्    (Birthday Song in  Sanskrit)-  जन्मदिनम् इदं, अयि प्रिय सखे,  शं तनोतु ते सर्वदा मुदम् । प्रार्थयामहे भव  शतायुषी,  इश्वरः सदा  तवां च रक्षतु । पुण्यकर्मणा कीर्तिमर्जय,  जीवनं तव भवतु सार्थकम् ।। Meaning: O Dear Friend! May this birthday Bring auspiciousness and joy to you forever. Indeed, we all pray for your long life, and May the Lord always protect you. By noble deeds, may you attain fame and may your life be fulfilled.  Watch Video- https://youtu.be/TMfZs0dLz9M

संस्कृत भाषा का महत्त्व (Importance of Sanskrit)

संस्कृत भाषा का महत्त्व तथा आश्चर्यजनक तथ्य- संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है तथा विश्व का सर्वप्रथम ग्रन्थ ऋग्वेद संस्कृत में ही है। सबसे शुद्ध व्याकरण (Accurate Grammar) आचार्य पाणिनी सुविरचित-‘अष्टाध्यायी’ संस्कृत का ही है। सबसे अच्छा कैलेंडर जिसमें नया साल सौर-प्रणाली के भूवैज्ञानिक परिवर्तन के साथ शुरू होता है संस्कृत का है। संदर्भ: जर्मन स्टेट यूनिवर्सिटी स्वास्थ्य के लिए सबसे उपयोगी भाषा अर्थात संस्कृत में बात करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है दिमाग तेज होता है, स्मरण-शक्ति, एकाग्रता तथा सकारात्मकता बढ़ती है। यह ‘स्पीच-थैरपी’ में भी मददगार है। विसर्ग(:) से उच्चरण से कपालभाती प्राणायाम तथा अनुस्वार (म्) के उच्चारण से भ्रामरी प्राणायाम का लाभ प्राप्त होता है। भाषाओं की माँ संस्कृत- विश्व की लगभग सभी भाषाएं (97%) प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संस्कृत से प्रभावित है। जैसे- हिन्दी, इंगलिश, जर्मन आदि। संदर्भ: यूएनओ कंप्यूटर में प्रयोग के लिए भी सबसे अच्छी भाषा है अगली पीढ़ी के ‘सुपर कंप्यूटर’ संस्कृत भाषा पर आधारित बनाए जा रहे हैं जिससे सुपर कंप्यूटर अपनी अधिकतम सीमा...

दैनिक-व्यवहार-वाक्य-संग्रहः (Useful Sanskrit Sentences)

दैनिक-व्यवहार-वाक्य-संग्रहः (Useful Sanskrit Sentences) हरिः ॐ / नमो नमः/ नमस्कारः/ प्रणामः ! = Hello ! सुप्रभातम् आचार्य ! = Good morning  सुमध्याहनम् = Good afternoon/Good evening. शुभरात्रिः । = Good night. अस्तु । = All right./ O.K. कृपया । = Please. धन्यवादः । = Thank You. स्वागतम् । = Welcome. क्षम्यताम् । = Excuse/ Pardon me/ Sorry. चिन्ता मास्तु । = Don’t worry. श्रीमन् । = Sir. मान्या/आर्या । = Lady. साधु साधु/ समीचीनम् । = Very good. आम् । = Yes, (Dear, Sir.) न =No अलम् =Enough/ Stop. आचार्य अहं जल-पानार्थं गन्तुम् इच्छामि। = May I go to Drink Water आचार्य अहं लघुशङ्कार्थं गन्तुम् इच्छामि। =May I go for toilet आचार्य अहं .............कार्यार्थं गन्तुम् इच्छामि। = I want to go for…………….. अहं प्रक्ष्टुम् इच्छामि। = I want to ask अहं न जानामि। =I Don’t know मया न ज्ञातम्। =I didn’t Understand कथमस्ति भवान्/भवती? = How are you ? आगच्छन्तु । = Come in. उपविशन्तु । = sit down.   उत्तिष्ठन्तु = S...

मंगलाचरणम् (Manglacharanam)

मंगलाचरणम् अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया । चक्षुरुन्नमीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः।। अर्थ- अज्ञान रुपी अंधकार से अंधी हुई आँखो को, ज्ञान रुपी प्रकाश से खोलने वाले अपने गुरु को हम प्रणाम करते हैं। सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।। अर्थ- हे प्रभु! सभी सुखी रहें, सभी स्वस्थ रहें, सभी का कल्याण हो तथा इस संसार में कोई दुखी न हो । ॐ भद्रं कर्णेभिः श्रृणुयाम देवाः ।  भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवा गूँ सस्तनूभिः ।  व्यशेमहि देवहितं यदायुः ।। अर्थ- हे प्रभु! हम अपने कानों से जो भी सुने वह पवित्र एवं कल्याणकारी हो। आँखों से जो भी देखें वह पवित्र एवं कल्याणकारी हो। हम मज़बूत एवं स्वस्थ-शरीर युक्त होकर सन्तोष-पूर्वक जीवन यापन करें तथा अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में प्रभु के गुणों का गुणगान करते रहें। ॐ असतो मा सद्गमय ।  तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय ।। अर्थ-   हे प्रभु! मुझे असत्य से सत्य (बुराई से अच्छाई) की ओर ले चलो।  हे प्रभु! मुझे अज्ञान रुपी अन्धकार से ज्ञान रुपी प्र...